बदलता जापान: एक राजनीतिक-आर्थिक चक्रव्यूह

जापान दो मोर्चों पर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है; राजनीतिक और आर्थिक। परंतु दुर्भाग्य से वह पूर्वी एशियाई क्षेत्र में अपने तीन कट्टर प्रतिस्पर्धी-सह-प्रतिद्वंदी देशों जैसे चीन, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के मध्य क्षेत्रीय तनाव में निरंतर वृद्धि के साथ जुड़ा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र का नेतृत्व करने हेतु उपयुक्त मध्यमार्ग खोजने के लिए पूर्वी एशिया में प्रमुख शक्तियों के नीति प्रयोग को देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। जापान अपनी सुरक्षा छतरी में तेजी से परिवर्तन देख रहा है, जिसमें दूर-दराज के कुछ समान विचारधारा वाले, परंतु परिवर्तनशील अभिकर्ता शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों से जापान जिन राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, उसके दौरान, बहुसंख्यक सरकार जनता के मध्य अपना समर्थन खो रही है, जिसे बढ़ावा देने में कोविड व उसके बाद के प्रभावों का काफी योगदान है। जापानी सत्तारूढ़ पार्टी दिन-प्रति-दिन अपना इक्का खोती जा रही है तथा सहयोगी दल अपनी राजनीतिक संपदा को बाहरी इलाकों एवं महानगरीय क्षेत्रों में भी तलाश रहे हैं। जापान पूरी तरह से वैक्सीन के आयात पर निर्भर है, जिसके कारण उसके घाटे के समीकरणों को बढ़ाने वाले कर्ज, भविष्य के लिए एक अन्य बोझ बनते जा रहे है। इन सभी अव्यवस्थाओं के मध्य, जापानी नागरिक देश में दो प्रमुख स्थानान्तरण देख रहे हैं।

राजनीतिक मोर्चा

डाइट (जापानी संसद) में प्रतिनिधि सभा के सदस्यों के 49वें आम चुनाव की घटना वैश्विक समाचार एजेंसियों की सुर्खियां बटोर रही है। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के एक वर्षीय प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा के पद छोड़ने तथा अगला राष्ट्रपति चुनाव न लड़ने के फैसले के पश्चात्, चार दावेदार उनके उत्तराधिकारी की दौड़ में शामिल हुए हैं। जापान के लिए भी यह ऐतिहासिक है क्योंकि इस बार राष्ट्रपति पद के लिए नामित उम्मीदवारों में से दो महिला उम्मीदवार हैं तथा यदि बदलाव की हवा चलती है, तो जापान को आधुनिक इतिहास में अपनी पहली महिला प्रधानमंत्री मिल जाएगी। पुरुष उम्मीदवारों में तारो कोनो व फुमियो किशिदा शामिल हैं तथा महिला उम्मीदवारों में साने ताकाची व सेको नोडा सम्मिलित हैं। एलडीपी अभी जापान में उच्चतम अनुमोदन रेटिंग पार्टी (33.8%) है, उसके बाद कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (CDPJ) (7.4%) भारी अंतर के साथ है। एक अन्य पार्टी जिसे जापानी मतदाताओं का महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त है, वह है- कोमिटो (3.4%), जो वर्तमान सरकार में एलडीपी के साथ गठबंधन में है। यहां यह उल्लेख करना उचित है कि कैबिनेट की अनुमोदन रेटिंग भी 27% से बढ़कर 30.3% हो गई है जो टोक्यो में एलडीपी सरकार की नीति स्तर की पहलों के सकारात्मक रुझानों को दर्शाती है। घोषणापत्र के तहत प्रस्तावित योजनाओं और टीकाकरण की गति को जापानी नागरिकों से सकारात्मक एवं वर्धित प्रतिक्रिया मिल रही है। सुगा के इस्तीफे के बाद, एलडीपी का समर्थन दैनिक आधार पर बढ़ रहा है, जो रेटिंग के साथ-साथ मतदाताओं की संख्या के समेकन में परिलक्षित होता है। इससे निष्कर्ष निकलता है कि भविष्य की सरकार की संभावना एलडीपी के कंधों पर है तथा 29 सितंबर, 2021 को होने वाली राष्ट्रपति पद की दौड़ के विजेता जापान के भावी प्रधानमंत्री का निर्णय करेंगे।

लेकिन जैसा कि कहा जाता है, सरलता से कुछ प्राप्त नहीं होता है। जापानी आम चुनाव इस बार ऐसे दौर में होने वाले है, जब पूर्वी एशियाई क्षेत्र में मौजूद प्रत्येक देश के मध्य तनाव बढ़ रहा है। जापान में राष्ट्रपति पद के सभी चार उम्मीदवार यासुकुनी पवित्र स्थान के निरंतर आगंतुक हैं, जिसे चीन और कोरिया द्वारा पूर्वी एशियाई जापानी बस्तियों में युद्ध अपराध करने वालों की प्रशंसा करने हेतु एक स्थान के रूप में माना जाता है। जापान के पड़ोसी देश यह आरोप लगा रहे हैं कि भविष्य का नेता पहले जैसा रहमदिल व नियंत्रण रखने वाला नहीं होगा।

दूसरा मुद्दा नीतियों के परमाणु पुनर्स्थापन के साथ आता है। दो प्रमुख उम्मीदवार किशिदा और ताकाची ने 2050 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयासों के रूप में लघु मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों की शुरूआत के लिए अपने समर्थन की घोषणा की। जैसा कि हम जानते थे, जापानी परमाणु रिएक्टर 2011 फुकुशिमा परमाणु आपदा के बाद से ऑफ़लाइन हैं, जापानी नेतृत्व को विस्तारित जापानी भूमि की ऊर्जा जरूरतों को बनाए रखने के लिए अपने नागरिक शक्ति शस्त्रागार को सुधारने की सख्त जरूरत है। लेकिन जापानी नौकरशाहों और आबादी का एक वृहद भाग इस परमाणु नीति पहल के पक्ष में नहीं है। यहां तक ​​कि 20 एलडीपी विधि निर्माताओं ने भी हाल के दिनों में अपनी निराशाजनक गति को प्रदर्शित किया है।

जापानी सांसद साने ताकाइची, 8 सितंबर को टोक्यो, जापान में प्रधान मंत्री योशीहिदे सुगा को सफल करने के लिए सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) नेतृत्व की दौड़ में दौड़ने की घोषणा करने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान मीडिया के सदस्यों को उनके प्रश्न पूछने के लिए हाथ उठाते हुए देखती हैं। 2021.

एकल उम्मीदवार पर स्थिर रह पाने की एलडीपी की असमर्थता ने प्रान्तों और स्थानीय निकायों में अन्य छोटे सीमांत दलों के प्रति पार्टी के विभाजनकारी चरित्र को उजागर किया। इससे चुनाव में बूथ स्तर पर एलडीपी के मतों के अनुपात पर नकारात्मक प्रभाव पहुंचेगा। पार्टी के युवा और चुनावी रूप से कमजोर सदस्य, केंद्रीय कमान में विश्वास खो रहे हैं तथा ब्लॉक प्रतिनिधित्व के लिए छोटे लेकिन प्रभावी प्रतिनिधियों के प्रति लामबंद हो रहे हैं। यह उम्मीद की जाती है कि जापान के राजनीतिक रूप से कमजोर विपक्ष को आने वाले उप-प्रान्तीय एवं नगरपालिका चुनावों में निश्चित रूप से अधिलाभ प्राप्त होगा।

2012 के आम चुनावों के पश्चात्, जहां एलडीपी को पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत मिला, वहीं सहयोगी और विपक्षी दल बाद में एलडीपी गढ़ों से सीटें हासिल कर रहे हैं। कोमिटो, एक सहयोगी दल ने स्वयं एलडीपी की संरक्षित राजनीतिक पूंजी के साथ सीटें हासिल कीं। हाल ही में हुए टोक्यो विधानसभा चुनाव इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जहां एलडीपी अपने सहयोगी कोमिटो के साथ 127 में से 64 सीटों के बहुमत को प्राप्त करने में विफल रही, परंतु वे 31 सीटें (पहले 46 सीटें) जीतकर शीर्ष पायदान पर हैं। संक्षेप में, अब यह बहुत अच्छी तरह से स्थापित हो गया है कि जापान में छोटी और एजेंडा/मुद्दों से संचालित राजनीतिक संस्थाएं एलडीपी की सीटों में कमी का मुख्य कारण हैं।

आर्थिक मोर्चा

आने वाले दिनों में जापान के नए नेतृत्व को दुगुने आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ेगा; पहला, बढ़ता घाटा और दूसरा, स्थिर जीडीपी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, 2020-2021 में जापान का चालू खाता घाटा (CAD) $ 165.82 से बढ़कर $ 195.03 बिलियन हो गया है, जो कि इसके सकल घरेलू उत्पाद में से 0.3% (3.3% से 3.6%) की वृद्धि है। इसका अर्थ है कि जापान दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया व लैटिन अमेरिका के कड़े प्रतिस्पर्धी बाजारों में अपने निर्यात बाजार का विस्तार नहीं कर पाएगा। यह सच है कि ओलंपिक खेलों के कारण, सामान्य सरकारी शेष जीडीपी के -11.3% से मजबूत होकर -8.5% हुआ तथा मुद्रास्फीति में 0.1% की वृद्धि हुई है। साथ ही इससे स्थानीय उत्पादन इकाइयों को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक बढ़ावा मिला, लेकिन लाभ की भरपाई के लिए अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों ने स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों की तुलना में अधिक आयात किया। राजकोषीय घाटे की स्थिति भी अच्छी नहीं है क्योंकि सरकार पिछले दो वित्तीय वर्षों में ओलंपिक खेलों की तैयारी एवं अर्थव्यवस्था के पहिए को गतिमान रखने के लिए अधिक खर्च करती रही। महामारी के कारण एक ही वित्त वर्ष में इसे 2.7% से बढ़ाकर 3% कर दिया गया, जिसने 2020 में देश की जीडीपी को -4.8% तक कम कर दिया। इस वर्ष सरकारी खर्च $ 102.7 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद थी जो हासिल कर लिया गया था लेकिन जीडीपी $ 5 ट्रिलियन पर सपाट बनी हुई है और यह अगले दो वित्तीय वर्षों तक समान रहेगा।

चीन से श्रम न मिलने के कारण कृषि क्षेत्र को भी गहरा धक्का लगा। हालांकि कृषि क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद को केवल 1.2% समर्थन प्रदान करता है, लेकिन 3.4% कार्यबल को रोजगार देता है, जो जापान के लिए काफी है। कोविड प्रतिबंधों ने इस अत्यधिक अनुदान वाले व संरक्षित क्षेत्र को दोनों ओर से घाटे में चलने वाली इकाई में परिवर्तित कर दिया क्योंकि चावल और चाय के उत्पादन के लिए अनुदान में वृद्धि होने के बावजूद पर्याप्त कृषि श्रमिकों की अनुपलब्धता के कारण उत्पादन गिर गया।

सरकार को एक साथ स्थिर जीडीपी और गिरती मांग के दो सींग वाले गैंडे से लड़ना है। इस आर्थिक दुष्चक्र का विरोध करने का एकमात्र तरीका नए विदेशी वित्त पोषण (एफआईआई/एफडीआई) को बढ़ाना एवं प्रेषण में वृद्धि करना है। ओडीए / एलओसी से प्राप्त आय एवं ब्याज, अल्पावधि में सरकार की समस्याओं को कम कर सकते हैं। एलडीपी नीति निर्माताओं की परियोजनाएं केवल अक्षय ऊर्जा और 5जी नेटवर्क विस्तार जैसे विकास क्षेत्रों पर खर्च में वृद्धि करती हैं। दो उम्मीदवारों ने पहले ही अपने राजनीतिक घोषणापत्र में इन्हें शामिल कर इस ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। जापान में पिछले 3-4 वर्षों से मौद्रिक सहजता विफल रही और अब तारो कोनो ने स्वयं एबेनॉमिक्स के इस सूत्र से दूरी बना ली। नए एलडीपी उम्मीदवारों ने सीधे कंपनियों को कर प्रोत्साहन की पेशकश करने का प्रस्ताव रखा जिससे उनके वेतन में वृद्धि होगी और खर्च के लिए उनके हाथों में पैसा आएगा।

जापानी वित्तीय नीति निर्माताओं के लिए, निरंतर जीडीपी जाल ठहराव की तुलना में अत्यधिक पीड़ा का दोहन करता है। यह बहुत अच्छी तरह से समझा जा सकता है कि एक के द्वारा दूसरे को आर्थिक चक्र में संचालित किया जाता है लेकिन अंतिम परिणाम कारण से अधिक दर्दनाक होता है। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) प्रकृति में उदार बनने के लिए आक्रामक मौद्रिक नीति पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहा है। लेकिन एलडीपी को संदेह था कि आने वाले दशक में बीओजे का 2% मूल्य लक्ष्य प्राप्त करना कठिन है। अलबेत, फुमियो किशिदा जापान के प्रत्येक आवश्यक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन पैकेज जारी रखने के लिए बीओजे का समर्थन करते हैं। उन्होंने अपने चुनावी घोषणापत्र में $ 30 ट्रिलियन से अधिक खर्च करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने विशेष रूप से एफएमसीजी और तकनीकी क्षेत्रों में उद्योगों को चलाने में मदद करने के लिए अगले दशक तक बिक्री कर को 10% बनाए रखने की रणनीति पर रोक लगा दी।

साने ताकाइची ने ‘सानेनॉमिक्स’ के तहत अपना दृष्टिकोण रखा, जो बजट संतुलन को तब तक रोक देता है जब तक कि मुद्रास्फीति अपने 2% के लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाती है ताकि खर्च के बढ़ते चक्र को प्राप्त करने के लिए राजकोषीय और मौद्रिक नीतियां व्यवहार में विस्तारवादी बनी रहें। मूल रूप से, ‘सानेनॉमिक्स’ के तीन स्तंभ हैं:

 – साहसिक मौद्रिक सहजता

 – राजकोषीय खर्च

 – विपदा-नियंत्रण निवेश

इन तीनों तरीकों में, जापान को खुले बाजारों के लिए और अधिक ऋणपत्र जारी करने होंगे जो बाद में वित्तीय स्वास्थ्य के लिए वर्तमान बोझों के साथ एक अतिरिक्त बोझ बन जाएगा। हम सभी जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अप्रैल 2021 के अद्यतन अनुमानों के अनुसार, जापान का सार्वजनिक ऋण 2020 में 256.2% तक पहुंच गया और 2021 में 256.5% पर स्थिर रहेगा तथा 2022 में गिरावट का रुझान 253.6% तक रहेगा। ‘सानेनॉमिक्स’ के तहत यह आगे चलकर 300% हो जाएगा जो आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जापानी मुद्रा (¥) के मूल्य में गिरावट कर देगा। महामारी के प्रभाव और लंबे समय से चले आ रहे ठहराव के मुद्दे को कम करने हेतु स्वयं के उपायों से घाटे को अनुपातहीन तरीके से बढावा देना एक अच्छा विचार नहीं होगा क्योंकि प्रधानमंत्री सुगा ने पहले ही लंबी अवधि के सार्वजनिक निवेश के लिए ¥ 73.6 ट्रिलियन के प्रोत्साहन की घोषणा की थी।

निष्कर्ष

जापान संभावित वित्तीय संकुचन और लंबे समय से गतिरोध की दोधारी तलवार के मध्य फंसा हुआ है। इनका राजनीतिक समाधान प्राप्त करने के लिए जापान को रक्षा एवं भू-रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी विस्तारवादी रणनीति में कटौती करनी होगी। जब पूर्वी एशियाई क्षेत्र के सदस्य सुदूर क्षेत्रों में अपने हस्तक्षेप का तेजी से विस्तार कर रहे हैं, तब जापानी राजनेता घर पर रहने के विकल्प पर विचार नहीं कर रहे हैं। साथ ही हिंद-प्रशांत के उच्च जल क्षेत्र में एक नए शीतयुद्ध को भांपते हुए पिछले 2 वर्षों से प्रमुख शक्तियों की भूमिका बढ़ रही है। जापानी राजनीति को इस उतार-चढ़ाव को अपने पक्ष में रखने के लिए देश में उभरती आकांक्षाओं को बड़े उम्दा तरीके से संतुलित करना होगा।

मेरी गणना में, यह आम चुनाव जापान को एक स्थिर नेता प्रदान करेगा और एलडीपी के मध्य गुट नेता को निरंतर वैश्विक मुद्दों की ओर देखने की अपेक्षा स्थानीय नीतियों के प्रति अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करेंगे। पार्टी के भीतर के गुटों का नेतृत्व पूर्व सरकारों या प्रमुख नीति निर्माताओं के दिग्गजों द्वारा किया जाएगा, जो संभावित अवसरों पर पार्टी स्तर पर प्रधानमंत्री के रुख को चुनौती देते हैं। यह उम्मीद की जाती है कि एलडीपी के राजनीतिक सहयोगी भविष्य के दिनों में स्थानीय चुनावों में बेईमान एवं सिद्धांतविहीन हो जाएंगे, जिससे आर्थिक नीतियों में भी सख्त रुख कमजोर होगा। राजनीतिक कठोरता नेताओं को उनके पक्ष में मुक्त अवसरों को संरेखित करने हेतु सक्रिय उपायों के लिए अधिक क्षमता प्रदान करती है। लेकिन जापान के मामले में, ऐसा लगता है कि गुटीय नेताओं का राजनीतिक सैलाब आने वाले दिनों में प्रगतिशीलता के ताने-बाने को फाड़ देगा। यदि अगले एक या दो वर्ष में राजनीतिक एकाग्रता प्राप्त नहीं की गई तो जापान एक और लुप्त दशक देखेगा।

कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (सीडीपीजे), डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (डीपीजे), जापानी कम्युनिस्ट पार्टी (जेसीपी), जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी), और नवगठित डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ पीपल (डीपीपी) जैसी विपक्षी पार्टियों ने बच्चों को केंद्र में रखने वाली सत्तारूढ़ पार्टी की विकास रणनीति का समर्थन किया। जापान को चुनाव के बाद, आने वाले दिनों में राजनीतिक शांति के लिए घटती आबादी पर तुरंत ध्यान केंद्रित करना होगा, लेकिन स्थानीय स्तर पर उपभोक्ताओं व श्रमिकों के समूह का समर्थन करने हेतु लंबे समय से लंबित प्रयास शुरू करने होंगे। जापान का सशक्त विनिर्माण क्षेत्र सरकार को एक और वर्ष के लिए खर्च बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण स्वतंत्रता प्रदान करता है तथा जैसे-जैसे जापान अगले वित्तीय वर्ष में आगे बढ़ेगा, आर्थिक सुधार की गति बढ़ेगी। पर्याप्त विदेशी मांग के साथ मिलकर अर्थव्यवस्था को पुनः खोलने से निर्यात में वृद्धि होगी, लेकिन मांग में कमी, निम्न वेतन वृद्धि, दुर्लभ प्रवासी श्रमिक और घटती आबादी, जापान को मंद विकास प्रक्षेपवक्र में वापस लाएगी, जिसका सामना जापान ने अपने पूर्व-महामारी चरण में किया था।

शशांक एस. पटेल

शशांक एस. पटेल पूर्वी एशियाई अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में पीएचडी छात्र हैं। इसके अलावा, वह पूर्वी एशियाई मामलों के अनुसंधान विश्लेषक के रूप में द कूटनीती के लिए लिखते हैं। पूर्व में, वह उत्तर पूर्वी परिषद, डोनर मंत्रालय, भारत सरकार में सलाहकार थे। उन्होंने नीतिगत मामलों पर काम किया और नई दिल्ली में उपाध्यक्ष, एनईसी के कार्यालय से जुड़े थे।

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